गोबिंद कुमार यादव
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शनिवार, 5 दिसंबर 2020
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल की निबन्ध-कला
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आचार्यरामचन्द्र शुक्ल (1884-1941 ई.) हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ निबन्धकार हैं। चिन्तामणि में संकलित निबन्धों में शुक्लजी की निबन्ध कल...
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रामविलास शर्मा की आलोचना दृष्टि
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रामविलास शर्मा की आलोचना दृष्टि - गोबिंद कुमार यादव ...
मंगलवार, 25 अगस्त 2020
चित्रलेखा उपन्यास में व्यक्त पात्र-योजना
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चित्रलेखा उपन्यास में व्यक्त पात्र-योजना कोई भी साहित्यिक रचना हो, उसमें पात्रों का महत्त्व सर्वाधिक होता है। पात्र ही रचना को मानवों ...
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शनिवार, 16 मई 2020
"मजदुर"
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"मजदुर" मुफ़लिसी का दर्द ए बयां यह था कि अपनों से, अपने गाँव से, अपनी...
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मंगलवार, 7 अप्रैल 2020
सागर-कन्या और खग-शावक यात्रा वृतांत की समीक्षा
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सागर-कन्या और खग-शावक अज्ञेय द्वारा लिखित एक यात्रा वृतांत है जिसमे उन्होंने ने डेनमार्क की संस्कृति के माध्यम से भारतीय स...
'काव्य में लोकमंगल की साधनावस्था' निबंध की समीक्षा।
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काव्य में लोकमंगल की साधनावस्था आचार्य रामचंद्र शुक्ल द्वारा लिखित एक वैचारिक निबंध है। यह निबंध विचार प्रधान होते हुए भी भावुकता और बुद...
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शुक्ल युगीन हिंदी आलोचना की प्रवृतियां।
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हिंदी में विशुद्ध आलोचना का प्रारंभ शुक्ल युग से माना जाता है। शुक्ल पूर्व हिंदी आलोचना में ना कोई आदर्श था ना कोई सिद्धांत। शुक्ल के...
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शुक्रवार, 3 अप्रैल 2020
'आहुति' कहानी की समीक्षा।
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प्रेमचंद की कहानी 'आहुती' - गोबिंद कुमार य...
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