तुलसीदास के काव्य में भाव पक्ष और शैली पक्ष का वर्णन कीजिए।
गोस्वामी तुलसीदास का काव्य हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर है। उनके काव्य की महानता का आधार उनका सशक्त भाव पक्ष और सरल, प्रभावशाली शैली पक्ष है। भाव और शैली का ऐसा संतुलित और लोकग्राह्य रूप हिंदी साहित्य में विरल है। तुलसीदास ने अपने काव्य के माध्यम से भक्ति, प्रेम, करुणा, आदर्श और लोकमंगल को कलात्मक अभिव्यक्ति प्रदान की है।
(क) तुलसीदास के काव्य का भाव पक्ष
1. भक्ति भावना
तुलसीदास के काव्य का मूल भाव भक्ति है। उनकी भक्ति राम के प्रति अनन्य और निष्काम है। रामचरितमानस, विनय पत्रिका और गीतावली में भक्ति विविध रूपों में प्रकट होती है—दास्य, वात्सल्य और सख्य भाव। यह भक्ति भावना हृदय को स्पर्श करने वाली है।
2. करुणा और प्रेम
तुलसीदास के काव्य में करुणा का अत्यंत मार्मिक रूप देखने को मिलता है। सीता हरण, वनवास, भरत की विरह-व्यथा और राम-सीता मिलन जैसे प्रसंग पाठक के हृदय को द्रवित कर देते हैं। प्रेम यहाँ केवल दांपत्य तक सीमित नहीं, बल्कि मानवीय करुणा का व्यापक रूप है।
3. आदर्शवाद
तुलसीदास का काव्य आदर्शों का काव्य है। राम आदर्श पुत्र, पति, भाई और राजा हैं; सीता आदर्श नारी हैं; भरत त्याग और भ्रातृ प्रेम के प्रतीक हैं। ये आदर्श समाज को नैतिक दिशा प्रदान करते हैं।
4. लोकमंगल और सामाजिक चेतना
तुलसीदास का भाव पक्ष लोकमंगल से जुड़ा हुआ है। वे समाज में व्याप्त कुरीतियों, अहंकार और अधर्म का विरोध करते हैं तथा सदाचार, सत्य और धर्म का समर्थन करते हैं।
(ख) तुलसीदास के काव्य का शैली पक्ष
1. भाषा शैली
तुलसीदास ने अवधी और ब्रजभाषा को काव्य की भाषा बनाया। उनकी भाषा सरल, मधुर और भावानुकूल है। जनसाधारण भी उनके काव्य को सहज ही समझ सकता है। यही उनकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण है।
2. वर्णन शैली
उनकी वर्णन शैली अत्यंत सजीव और चित्रात्मक है। वन, नगर, युद्ध, सभा और प्राकृतिक दृश्यों का वर्णन आँखों के सामने सजीव हो उठता है।
3. संवाद शैली
रामचरितमानस में संवाद शैली अत्यंत प्रभावशाली है। पात्रों के संवाद उनके चरित्र और भावनाओं को स्पष्ट करते हैं। राम-भरत संवाद इसका श्रेष्ठ उदाहरण है।
4. अलंकार और छंद
तुलसीदास के काव्य में उपमा, रूपक, अनुप्रास जैसे अलंकार सहज रूप से प्रयुक्त हुए हैं। दोहा, चौपाई, सोरठा और छप्पय छंदों का सुंदर प्रयोग उनकी शैली को संगीतात्मक बनाता है।
5. सरलता और प्रवाह
तुलसीदास की शैली की सबसे बड़ी विशेषता उसकी सरलता और प्रवाह है। भाव और भाषा में कोई कृत्रिमता नहीं दिखाई देती। यही कारण है कि उनका काव्य सदियों बाद भी उतना ही प्रभावी है।
निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि तुलसीदास के काव्य में भाव पक्ष और शैली पक्ष का अद्भुत समन्वय है। उनके भाव गहरे, लोकमंगलकारी और मानवीय हैं, जबकि उनकी शैली सरल, सरस और प्रभावशाली है। यही कारण है कि तुलसीदास हिंदी साहित्य के अमर कवि हैं और उनका काव्य आज भी जन-जन के हृदय में जीवित है।
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